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डायबिटीज़ (मधुमेह) होने के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके | Diabetes Symptoms in Hindi
आज के समय में डायबिटीज़ (Diabetes) एक बहुत आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। पहले यह समस्या केवल 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह कम उम्र में भी तेजी से बढ़ रही है।
Image Source: Pixabay
डायबिटीज़ एक लाइफस्टाइल डिजीज़ है, जो हमारी खान-पान की आदतों और दिनचर्या से गहराई से जुड़ी होती है। इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
इसलिए, अगर आप अपने शरीर में नीचे बताए गए लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इन्हें हल्के में न लें — यह डायबिटीज़ की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।
डायबिटीज़ क्या है?
डायबिटीज़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारे शरीर में ब्लड शुगर (ग्लूकोज़) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
शरीर में इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। लेकिन जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या शरीर उसे ठीक से उपयोग नहीं कर पाता, तब शुगर खून में बढ़ने लगती है।
डायबिटीज़ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
टाइप 1 डायबिटीज़ – इसमें शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।
टाइप 2 डायबिटीज़ – इसमें इंसुलिन तो बनता है, लेकिन शरीर उसे सही से उपयोग नहीं कर पाता।
डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षण
नीचे बताए गए लक्षणों में से अगर आपको 3 या अधिक लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपना ब्लड शुगर टेस्ट करवाएं।
1. बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination)
अगर आपको दिन में कई बार और खासकर रात में बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो रही है, तो यह डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है।
जब शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी उसे मूत्र के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करती है।
2. बहुत ज्यादा प्यास लगना (Excessive Thirst)
डायबिटीज़ होने पर बार-बार पेशाब आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
इस वजह से व्यक्ति को बार-बार प्यास लगती है और वह बार-बार पानी पीता है।
3. वजन का तेजी से घटना या बढ़ना
अगर आपका वजन बिना किसी कारण के तेजी से घट रहा है या अचानक बढ़ रहा है, तो यह भी डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है।
शरीर में शुगर का उपयोग सही तरह से न होने पर ऊर्जा की कमी होती है, जिससे वजन कम होने लगता है।
4. थकान और कमजोरी महसूस होना
डायबिटीज़ में ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, जिससे ऊर्जा की कमी होती है।
इससे व्यक्ति को हर समय थकान, आलस्य और कमजोरी महसूस होती है।
5. धुंधला दिखना (Blurry Vision)
ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव से आंखों की नसों पर असर पड़ता है।
इससे व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है और आंखों में दर्द या जलन भी हो सकती है।
6. घाव या कट का जल्दी न भरना
अगर आपके शरीर पर कोई छोटा सा घाव या कट कई दिनों तक नहीं भर रहा है, तो यह डायबिटीज़ का लक्षण हो सकता है।
उच्च शुगर स्तर शरीर की हीलिंग क्षमता को कम कर देता है।
7. हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
डायबिटीज़ का असर शरीर की नसों पर भी होता है।
इससे हाथों-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन जैसी समस्या हो सकती है, जिसे न्यूरोपैथी (Neuropathy) कहा जाता है।
8. त्वचा पर खुजली या संक्रमण
डायबिटीज़ में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
इस वजह से त्वचा पर खुजली, फंगल इंफेक्शन या ड्राई स्किन जैसी समस्या बढ़ जाती है।
9. भूख ज्यादा लगना
डायबिटीज़ में शरीर को ग्लूकोज़ नहीं मिल पाता, जिससे बार-बार भूख लगती है।
आप चाहे कितना भी खा लें, फिर भी आपको ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
डायबिटीज़ की जांच कैसे करें?
अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इन जांचों से आप निश्चित कर सकते हैं कि आपको डायबिटीज़ है या नहीं:
Fasting Blood Sugar Test – खाली पेट ब्लड शुगर की जांच।
PP (Post Prandial) Test – खाने के 2 घंटे बाद की ब्लड शुगर जांच।
HbA1c Test – पिछले 3 महीनों का औसत शुगर स्तर बताता है।
Urine Sugar Test – मूत्र में शुगर की जांच।
डायबिटीज़ से बचाव के उपाय
डायबिटीज़ का इलाज तो संभव है, लेकिन उससे बचाव करना और भी आसान है।
कुछ आसान जीवनशैली के बदलाव अपनाकर आप इस बीमारी से दूर रह सकते हैं:
1. नियमित व्यायाम करें – रोज़ाना 30 मिनट चलना या योग करना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
2. संतुलित आहार लें – मीठा, जंक फूड और अधिक तेल वाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करें।
3. तनाव कम करें – मानसिक तनाव ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है।
4. पर्याप्त नींद लें – 7-8 घंटे की नींद शरीर को स्वस्थ रखती है।
5. नियमित जांच करवाएं – अगर परिवार में किसी को डायबिटीज़ है, तो हर 6 महीने में शुगर टेस्ट जरूर करवाएं।
डायबिटीज़ से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
उत्तर: डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, वजन घटना, थकान, धुंधला दिखाई देना और घाव का देर से भरना शामिल है।
प्रश्न 2: डायबिटीज़ कैसे होती है?
उत्तर: डायबिटीज़ तब होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन (Insulin) नहीं बना पाता या इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
इससे खून में ग्लूकोज़ (Blood Sugar) की मात्रा बढ़ जाती है।
प्रश्न 3: डायबिटीज़ के मरीज क्या खा सकते हैं?
उत्तर: डायबिटीज़ के मरीजों को फाइबर युक्त भोजन जैसे सलाद, हरी सब्ज़ियाँ, ओट्स, दालें और लो-फैट दूध का सेवन करना चाहिए।
मीठे, तले हुए और जंक फूड से परहेज़ करें।
प्रश्न 4: क्या डायबिटीज़ ठीक हो सकती है?
उत्तर: डायबिटीज़ का पूरा इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और दवाओं से शुगर लेवल को सामान्य रखा जा सकता है।
प्रश्न 5: क्या डायबिटीज़ आनुवांशिक (Genetic) बीमारी है?
उत्तर: हाँ, अगर आपके माता-पिता या परिवार में किसी को डायबिटीज़ है, तो आपके अंदर भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए नियमित जांच करवाना ज़रूरी है।
प्रश्न 6: डायबिटीज़ में पानी ज्यादा पीना चाहिए या नहीं?
उत्तर: हाँ, डायबिटीज़ के मरीजों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
यह शरीर से अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।
प्रश्न 7: डायबिटीज़ की जांच कैसे करवाई जा सकती है?
उत्तर: आप Fasting Blood Sugar Test, PP Test और HbA1c Test करवाकर डायबिटीज़ की जांच कर सकते हैं।
ये टेस्ट आपके शुगर लेवल की सटीक जानकारी देते हैं।
प्रश्न 8: डायबिटीज़ के मरीज को दिन में कितनी बार खाना चाहिए?
उत्तर: डायबिटीज़ के मरीजों को दिन में 4–5 बार थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए ताकि ब्लड शुगर का स्तर स्थिर बना रहे।
प्रश्न 9: क्या डायबिटीज़ से हार्ट की समस्या हो सकती है?
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर लेवल दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को बढ़ा सकता है।
इसलिए डायबिटीज़ को समय पर नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 10: क्या डायबिटीज़ में चाय या कॉफी पी सकते हैं?
उत्तर: आप बिना शक्कर वाली ग्रीन टी या ब्लैक कॉफी ले सकते हैं, लेकिन मीठी या क्रीमी चाय-कॉफी से परहेज़ करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
डायबिटीज़ एक गंभीर लेकिन कंट्रोल की जा सकने वाली बीमारी है।
अगर इसके शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो इसे लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है।
स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह ही इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है, किसी भी इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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