अस्थमा (Asthma) होने के लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

आज के समय में अस्थमा यानी दमा (Asthma) एक बहुत आम लेकिन गंभीर बीमारी बनती जा रही है। यह एक सांस से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को सांस लेने और छोड़ने में परेशानी होती है। अस्थमा के मरीज को खासकर रात के समय या सुबह के समय सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। अगर इसे समय पर पहचानकर इलाज न किया जाए तो यह जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।

अस्थमा (Asthma) होने के लक्षण
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इस ब्लॉग में हम जानेंगे — अस्थमा क्या है, इसके लक्षण, कारण और घरेलू उपाय जिससे इसे नियंत्रण में रखा जा सके।


अस्थमा क्या है?

अस्थमा एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) श्वसन संबंधी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की नलिकाएं (airways) सूज जाती हैं या संकुचित हो जाती हैं। इसके कारण फेफड़ों में हवा का आवागमन रुक जाता है और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है।

जब किसी व्यक्ति को अस्थमा का अटैक (Asthma Attack) होता है तो उसकी सांस फूलने लगती है, सीने में जकड़न और खांसी बढ़ जाती है।


अस्थमा के प्रमुख लक्षण (Symptoms of Asthma)

अस्थमा के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि सही समय पर इलाज शुरू किया जा सके। इसके आम लक्षण इस प्रकार हैं:


1. बार-बार खांसी आना – खासकर रात या सुबह के समय सूखी खांसी होना।

2. सांस फूलना या सीटी जैसी आवाज आना – सांस लेते या छोड़ते वक्त सीटी जैसी आवाज आना।

3. सीने में जकड़न – ऐसा महसूस होना कि कोई चीज सीने को दबा रही है।

4. थकान महसूस होना – थोड़ी-सी मेहनत करने पर भी थकावट आना।

5. नींद में बाधा – रात में सांस की समस्या के कारण बार-बार नींद टूटना।

6. बार-बार ठंड लगना या एलर्जी होना – मौसम बदलते ही खांसी-जुकाम बढ़ जाना।

अगर ये लक्षण बार-बार दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


अस्थमा होने के कारण (Causes of Asthma)

अस्थमा के कई कारण हो सकते हैं — कुछ आनुवंशिक (genetic) तो कुछ पर्यावरणीय (environmental)। मुख्य कारण हैं:


1. धूल, धुआं और प्रदूषण

हवा में मौजूद धूल और धुआं अस्थमा को बढ़ावा देता है।

2. एलर्जी (Allergy)

परागकण (pollen), पालतू जानवरों के बाल, परफ्यूम या रासायनिक गंध से एलर्जी होने पर अस्थमा बढ़ सकता है।

3. ठंडी हवा या मौसम में बदलाव

अचानक मौसम बदलने से सांस की नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं।

4. तनाव और मानसिक दबाव

अत्यधिक तनाव या चिंता से अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।

5. वंशानुगत कारण

यदि परिवार में किसी को अस्थमा है तो अगली पीढ़ी में भी इसकी संभावना रहती है।

6. सिगरेट या धूम्रपान

धूम्रपान फेफड़ों की सेहत को कमजोर करता है और अस्थमा का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।


अस्थमा से बचाव के घरेलू उपाय (Home Remedies for Asthma)

अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं होता, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


1. भाप लेना (Steam Inhalation)

दिन में एक बार भाप लेने से सांस की नलिकाएं खुलती हैं और सांस लेना आसान होता है।

2. अदरक और शहद का सेवन

अदरक फेफड़ों की सूजन को कम करता है और शहद गले को राहत देता है।

3. हल्दी वाला दूध

हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो फेफड़ों की सूजन घटाते हैं।

4. धूल और धुएं से दूरी बनाए रखें

हमेशा साफ-सुथरे माहौल में रहें और मास्क का प्रयोग करें।

5. योग और प्राणायाम करें

कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे योगासन फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं।

6. भरपूर पानी पिएं

शरीर में नमी बनाए रखने से श्वसन नलिकाएं सूखती नहीं हैं और सांस लेना आसान होता है।

7. एलर्जी पैदा करने वाली चीज़ों से बचें

जैसे परफ्यूम, पालतू जानवरों के बाल, या धूल भरे स्थान।


अस्थमा के मरीजों के लिए कुछ जरूरी सुझाव

रोज़ाना हल्का व्यायाम करें।

धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें।

नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा बताए गए इनहेलर का उपयोग करें।

संतुलित आहार लें जिसमें फल, सब्जियाँ और प्रोटीन शामिल हों।

नींद पूरी लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।


डॉक्टर से कब संपर्क करें?

अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

दवा लेने के बाद भी सांस में आराम न मिले।

बार-बार अस्थमा के दौरे आने लगें।

बात करते या चलते समय सांस फूलने लगे।

सीने में अत्यधिक दर्द या जकड़न महसूस हो।



निष्कर्ष (Conclusion)

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो सावधानी और सही उपचार से पूरी तरह नियंत्रित की जा सकती है। अगर आप समय पर लक्षण पहचान लें, इनहेलर का सही उपयोग करें, और प्रदूषण से बचें, तो आप एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं।

याद रखें — “अस्थमा को रोकना इलाज से आसान है।”

स्वच्छ हवा, योग और हेल्दी लाइफस्टाइल से आप इसे हमेशा के लिए काबू में रख सकते हैं।


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